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मोहनीय कर्म कैसे बंधता है? कौन-सी आदतें बढ़ाती हैं हमारी कषाय?

Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj

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मोहनीय कर्म कैसे बंधता है? कौन-सी आदतें बढ़ाती हैं हमारी कषाय?

40 просмотров · 11 дней назад
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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आज के इस महत्वपूर्ण प्रवचन में साध्वी उदिता जी महाराज ने मोहनीय कर्म के स्वरूप और उसके बंध के कारणों का विस्तार से विवेचन किया। मोहनीय कर्म आत्मा के सम्यक् दर्शन और सम्यक् आचरण को प्रभावित करने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण कर्म माना गया है। इसके 28 भेदों और कषायों से जुड़े स्वरूप को समझना आत्मनिरीक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। इस प्रवचन में जानिए— 🔸 मोहनीय कर्म का पूरा स्वरूप क्या है? 🔸 मोहनीय कर्म का बंध किन कारणों से होता है? 🔸 कौन-से कारण हमारी कषायों को बढ़ाते हैं? 🔸 क्रोध, मान, माया और लोभ को बढ़ाने वाली प्रवृत्तियाँ कौन-सी हैं? 🔸 कर्मों को कम और समाप्त करने की शुरुआत कहाँ से करनी चाहिए? 🔸 अपने जीवन से उन कारणों को कैसे हटाया जाए जो बार-बार कर्मबंधन का कारण बनते हैं? कर्मों से मुक्ति की शुरुआत बाहर से नहीं, अपने भीतर के भावों को पहचानने से होती है। 🙏 प्रवचन को सुनें, चिंतन करें और आत्मनिरीक्षण की दिशा में एक कदम बढ़ाएँ। #मोहनीयकर्म #जैनधर्म #कषाय #कर्मसिद्धांत #जैनदर्शन #प्रवचन #आत्मचिंतन #कर्मबंधन #जैनप्रवचन