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सुख में बोरियत और दुःख में बेचैनी क्यों? | सिद्धों के सुख से सीखिए..

Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj

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सुख में बोरियत और दुःख में बेचैनी क्यों? | सिद्धों के सुख से सीखिए..

179 просмотров · 8 дн. назад
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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सुख और दुःख हमारे जीवन में क्यों आते हैं? क्या इनके पीछे केवल परिस्थितियाँ जिम्मेदार हैं, या इसके पीछे हमारे कर्मों का भी गहरा संबंध है? आज के विशेष प्रवचन में साध्वी श्री उदिता जी ने वेदनीय कर्म के माध्यम से जीवन के सुख-दुःख और उनसे निपटने की कला को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया। प्रवचन में जानिए— 🔸 जीवन में सुख और दुःख क्यों आते हैं? 🔸 सुख-दुःख आने पर हमें कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए? 🔸 हम जीवन में तराजू बनें या सुनार का काँटा—यह चुनाव किसका है? 🔸 वेदनीय कर्म किस प्रकार अपना फल देता है? 🔸 सामान्य प्राणी के सुख और सिद्ध भगवान के सुख में क्या अंतर है? 🔸 मनुष्य सुख मिलने के बाद भी उससे बोर क्यों हो जाता है? 🔸 क्या सिद्ध भगवान अपने अनंत सुख से कभी बोर होते हैं? 🔸 हमारा सुख बार-बार बदलता क्यों रहता है? 🔸 क्या सिद्धों के सुख में भी कोई परिवर्तन होता है? 🔸 वेदनीय कर्म को घाति कर्मों के बीच क्यों रखा जाता है? 🔸 वास्तव में वेदनीय कर्म घाति कर्म है या अघाति? यह प्रवचन हमें केवल सुख-दुःख को समझने की दृष्टि ही नहीं देता, बल्कि यह भी सिखाता है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हम अपनी प्रतिक्रिया और अपने जीवन की दिशा को कैसे उत्तम बना सकते हैं। सुनिए, समझिए और अपने जीवन में आत्मचिंतन की एक नई दृष्टि विकसित कीजिए। #वेदनीयकर्म #सुखदुःख #जैनधर्म #जैनदर्शन #कर्मसिद्धांत #सिद्धभगवान #साध्वीउदिताजी #समता #आत्मचिंतन #Jainism