मिथ्यात्व कैसे मिटे और सम्यक्त्व कैसे दृढ़ हो? | दर्शन मोहनीय व चारित्र मोहनीय कर्म का रहस्य |
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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मिथ्यात्व कैसे मिटे और सम्यक्त्व कैसे दृढ़ हो? | दर्शन मोहनीय व चारित्र मोहनीय कर्म का रहस्य |
75 просмотров · 12 дней назад
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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आज के इस महत्वपूर्ण प्रवचन में साध्वी उदिता जी महाराज ने मिथ्यात्व और सम्यक्त्व के अत्यंत गूढ़ विषय को सरल एवं जीवनोपयोगी रूप में समझाया।
प्रवचन में जानिए—
🔸 दर्शन मोहनीय कर्म क्या है और चारित्र मोहनीय कर्म क्या है?
🔸 दोनों कर्मों में मूल अंतर क्या है?
🔸 हम जाने-अनजाने दर्शन मोहनीय कर्म को कैसे बढ़ाते रहते हैं?
🔸 दर्शन मोहनीय कर्म को क्षीण/नष्ट करने की दिशा क्या है?
🔸 हमारा वास्तविक शुभचिंतक कौन है?
🔸 सुख-दुःख देने वाला वास्तव में दोषी है या हमारी अपनी दृष्टि?
🔸 आत्मा दोषी है या स्वभाव से निर्दोष?
🔸 सम्यक दर्शन को दृढ़ करने का कौन-सा सूत्र अपनाना चाहिए?
🔸 सम्यक्त्व को मजबूत करने के लिए जीवन में क्या परिवर्तन आवश्यक है?
🔸 भगवान महावीर और अन्य महापुरुषों ने बड़े-बड़े कष्टों को सहन क्यों किया?
🔸 कष्ट आने पर उन्होंने प्रतिकार क्यों नहीं किया?
🔸 कर्म, आत्मा और अपने परिणामों को समझने से जीवन की दृष्टि कैसे बदलती है?
यह प्रवचन हमें बाहरी परिस्थितियों में दोष खोजने के बजाय अपनी दृष्टि, अपने परिणाम और आत्मस्वभाव को पहचानने की प्रेरणा देता है।
प्रवचन: साध्वी उदिता जी महाराज
विषय: मिथ्यात्व, सम्यक्त्व एवं मोहनीय कर्म