भाग 5 | गीत गोविन्द | हिंदी भावार्थ | तृतीय अष्टपदी - वृन्दावन वसंत विहार | जयदेव जी
Vraja Madhuri
0:00 / 0:00
भाग 5 | गीत गोविन्द | हिंदी भावार्थ | तृतीय अष्टपदी - वृन्दावन वसंत विहार | जयदेव जी
841 просмотр · Трансляция закончилась 2 г. назад
Vraja Madhuri
5,71 тыс. подписчиков
841 просмотр · Трансляция закончилась 2 г. назад
गीत गोविंद एक प्राचीन संस्कृत काव्य है जो राधा-कृष्ण के अद्वितीय प्रेम की और विरह वेदना का अनुपम चित्रण करने वाला अनुपम काव्य है। इस काव्य में श्रीजयदेव ने राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक सम्बन्ध के अनुभव को संगीत, रस, और रोमांच से व्यक्त किया है।
गीत गोविंद के माधुर्यपूर्ण शब्द, संगीत, और भावों की मधुरता से, यह काव्य राधा-कृष्ण के प्रेम के आद्यात्मिक अनुभव को व्यक्त करता है। इसमें राधा का कृष्ण से वियोग की पीड़ा का वर्णन है। गीत गोविन्द रसोपासना के मूल ग्रंथों में से है | यह जगन्नाथ जी को अति प्रिय है और उन्हें गाकर उपासक को सुनाना चाहिए |
इस प्लेलिस्ट में गुरु माँ गीत गोविन्द के गूढ़ भाव को व्यक्त कर और राधा कृष्ण के प्रेम की विरह वेदना का मार्मिक और वर्णन कर रही हैं |
___________________________________________________
जगन्नाथाष्टकं
कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो
मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः
रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥
भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटे
दुकूलं नेत्रान्ते सहचर-कटाक्षं विदधते ।
सदा श्रीमद्-वृन्दावन-वसति-लीला-परिचयो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥२॥
महाम्भोधेस्तीरे कनक रुचिरे नील शिखरे
वसन् प्रासादान्तः सहज बलभद्रेण बलिना ।
सुभद्रा मध्यस्थः सकलसुर सेवावसरदो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥३॥
कृपा पारावारः सजल जलद श्रेणिरुचिरो
रमा वाणी रामः स्फुरद् अमल पङ्केरुहमुखः ।
सुरेन्द्रैर् आराध्यः श्रुतिगण शिखा गीत चरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥४॥
रथारूढो गच्छन् पथि मिलित भूदेव पटलैः
स्तुति प्रादुर्भावम् प्रतिपदमुपाकर्ण्य सदयः ।
दया सिन्धुर्बन्धुः सकल जगतां सिन्धु सुतया
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥५॥
परंब्रह्मापीड़ः कुवलय-दलोत्फुल्ल-नयनो
निवासी नीलाद्रौ निहित-चरणोऽनन्त-शिरसि ।
रसानन्दी राधा-सरस-वपुरालिङ्गन-सुखो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे ॥६॥
न वै याचे राज्यं न च कनक माणिक्य विभवं
न याचेऽहं रम्यां सकल जन काम्यां वरवधूम् ।
सदा काले काले प्रमथ पतिना गीतचरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥७॥
हर त्वं संसारं द्रुततरम् असारं सुरपते
हर त्वं पापानां विततिम् अपरां यादवपते ।
अहो दीनेऽनाथे निहित चरणो निश्चितमिदं
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥८॥
जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।
सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥९॥
__________________
ललितलवङ्गलतापरिशीलनकोमलमलयसमीरे ।
मधुकरनिकरकरम्बितकोकिलकूजितकुञ्जकुटीरे ॥
विहरति हरिरिह सरसवसन्ते
नृत्यति युवतिजनेन समं सखि विरहिजनस्य दुरन्ते ॥ १॥ विहरति
उन्मदमदनमनोरथपथिकवधूजनजनितविलापे ।
अलिकुलसंकुलकुसुमसमूहनिराकुलबकुलकलापे ॥ २॥ विहरति
मृगमदसौरभरभसवशंवदनवदलमालतमाले ।
युवजनहृदयविदारणमनसिजनखरुचिकिंशुकजाले ॥ ३॥ विहरति
मदनमहीपतिकनकदण्डरुचिकेसरकुसुमविकासे ।
मिलितशिलीमुखपाटलिपटलकृतस्मरतूणविलासे ॥ ४॥ विहरति
विगलितलज्जितजगदवलोकनतरुणकरुणकृतहासे ।
विरहिनिकृन्तनकुन्तमुखाकृतिकेतकदन्तुरिताशे ॥ ५॥ विहरति
माधविकापरिमलललिते नवमालिकजातिसुगन्धौ ।
मुनिमनसामपि मोहनकारिणि तरुणाकारणबन्धौ ॥ ६॥ विहरति
स्फुरदतिमुक्तलतापरिरम्भणमुकुलितपुलकितचूते ।
वृन्दावनविपिने परिसरपरिगतयमुनाजलपूते ॥ ७॥ विहरति
श्रीजयदेवभणितमिदमुदयति हरिचरणस्मृतिसारम् ।
सरसवसन्तसमयवनवर्णनमनुगतमदनविकारम् ॥ ८॥ विहरति
श्लोकः ॥ दरविदलितमल्लीवल्लिचञ्चत्पराग-
प्रकटितपटवासैर्वासयन् काननानि ।
इह हि दहति चेतः केतकीगन्धबन्धुः
प्रसरदसमबाणप्राणवद्गन्धवाहः ॥ ८॥
श्लोकः ॥ उन्मीलन्मधुगन्धलुब्धमधुपव्याधूतचूताङ्कुर-
क्रीडत्कोकिलकाकलीकलरवैरुद्गीर्णकर्णज्वराः । var - कलैः
नीयन्ते पथिकैः कथं कथमपि ध्यानावधानक्षण-
प्राप्तप्राणसमासमागमरसोल्लासैरमी वासराः ॥ ९॥
श्लोकः ॥ अनेकनारीपरिरम्भसम्भ्रम-
स्फुरन्मनोहारिविलासलालसम् ।
मुरारिमारादुपदर्शयन्त्यसौ
सखीसमक्षं पुनराह राधिकाम् ॥ १०॥
__________________
0:00 - जगन्नाथष्टकम
4:40 - राधा रानी का स्मरण
9:44 - वृन्दावन इतना श्रेष्ठ क्यों है?
12:00 - गीत गोविन्द का अधिरकारी कौन?
18:00 - वसंत ऋतु की महिमा
20:32 - तृतीय अष्टपदी भूमिका
25:00 - प्रेम की आचार्या श्री ललिता सखी
28:00 - ललिता सखी का राधा रानी को सम्बोधन
37:00 - तृतीय अष्टपदी अर्थ
45:30 - राधा कनक बेली और सुन्दर तमाल
46:30 - राधा रानी की विरह वेदना
59:25 - ललिता द्वारा वसंत का वर्णन कर राधा रानी को समझाने का प्रयास
__________________
📽️ PLAYLISTS 📽️
वृन्दावन महिमामृत हिंदी भावार्थ:
• वृन्दावन महिमामृत | Vrindavan Mahimamrita ...
विष्णु Sahasranama English meanings:
• Vishnu Sahasranam
विष्णु सहस्त्रनाम हिंदी भावार्थ:
• विष्णु सहस्त्रनाम
श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप :
• श्रीमद्भगवदगीता यथारुप
अन्य शिक्षाएँ :
• Плейлист
___________________________________________________
☎️ CONTACT DETAILS ☎️
1) Mail ID: smitavenkatesh108@gmail.com
2) Instagram ID: / smitavenkatesh.108
3) Whatsapp channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaEb...
4) Official Website: https://smitavenkatesh.com/
5) Medium blog: / smitavenkatesh
Hare Krishna!
__________________________________________________
#GeetGovind #GeetGovindinHindi #GeetGovindKeBhaw #GeetGovindBySmitaVenkatesh #GeetGovind ashtpadi #गीतगोविन्द #गीतगोविन्दहिंदीभावार्थ