*प्रकृति की कोख से सभी प्राणी कैसे पैदा होते हैं ? | *Shrimad Bhagavad Gita | Adhyay 14, Shlok 4
DR B K SHARMA
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*प्रकृति की कोख से सभी प्राणी कैसे पैदा होते हैं ? | *Shrimad Bhagavad Gita | Adhyay 14, Shlok 4
18 просмотров · 8 дн. назад
DR B K SHARMA
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नमस्ते दर्शकों,
ॐ श्री परमात्मने नमः। श्रीमद् भगवद् गीता के अध्याय 14 (गुणत्रयविभागयोग) के श्लोक 4 के इस विशेष अंक में आपका स्वागत है।
इस वीडियो में डॉ बी के शर्मा जी द्वारा श्लोक 4 का अत्यंत सरल सार-भाव विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक में अर्जुन को चराचर जगत के सभी जीवों की माताओं और उनके परम पिता का सार्वभौमिक सत्य समझाते हुए कहते हैं—
"सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः। तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता॥"
अर्थात,
हे कुन्तीपुत्र अर्जुन! नाना प्रकार की सब योनियों में जितने भी शरीरधारी जीव उत्पन्न होते हैं, उन सबकी गर्भ धारण करने वाली माता तो यह महद्-ब्रह्म रूप मूल प्रकृति है और मैं (परमेश्वर) ही उनमें चेतना रूप बीज को स्थापित करने वाला पिता हूँ।
इस वीडियो में मुख्य चर्चा:
✨ संसार की सभी योनियों और जीव-रूपों के निर्माण का आधार
✨ प्रकृति माता और साक्षात परमेश्वर पिता के अद्भुत संबंध की व्याख्या
✨ डॉ बी के शर्मा जी द्वारा व्यावहारिक जीवन के उदाहरणों के साथ सरल और मर्मस्पर्शी व्याख्या
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ॐ श्री कृष्णार्पणमस्तु 🙏