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52 गढ़ों को एक करने वाले राजा का रहस्यमयी किला🏰 | चांदपुर गढ़ी & आदि बद्री Travel Vlog

Vimal K Vlog

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52 गढ़ों को एक करने वाले राजा का रहस्यमयी किला🏰 | चांदपुर गढ़ी & आदि बद्री Travel Vlog

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चांदपुर गढ़ी का रहस्यमयी इतिहास और आदि बद्री धाम 🚩 | Chandpur Garhi Fort & Adi Badri Vlog ​दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम लेकर आए हैं गढ़वाल के उस सबसे ऐतिहासिक और रहस्यमयी किले के अवशेष जहाँ से पूरे गढ़वाल की नींव पड़ी थी — चांदपुर गढ़ी (Chandpur Garhi Fort) ​इस ब्लॉग में हम एक्सप्लोर करेंगे चांदपुर गढ़ी का किला जहाँ की पत्थर की नक्काशी प्राचीन अवशेष और स्थापत्य कला आज भी उस दौर की भव्यता बयां करती है इसके साथ ही पास में स्थित भगवान विष्णु के अति प्राचीन मंदिर आदि बद्री (Adi Badri) के भी दर्शन करेंगे ​📜 चांदपुर गढ़ी का इतिहास और कहानी (For Description & Voiceover) ​गढ़वाल राज्य की नीव: बात 888 ईस्वी (9वीं शताब्दी) की है जब मालवा (धार नगरी) से परमार वंश के राजा कनकपाल बद्रीनाथ यात्रा पर आए थे यहाँ उनकी मुलाकात चांदपुर गढ़ी के भानु प्रताप (भानुप्रिया) से हुई राजा भानु प्रताप ने अपनी पुत्री का विवाह कनकपाल से कराया और चांदपुर गढ़ी का राज्य उन्हें सौंप दिया ​52 गढ़ों का एकीकरण: आगे चलकर इसी राजवंश के राजा अजय पाल (1493–1500 ई.) ने बिखरे हुए 52 छोटे-छोटे गढ़ों (किलों/ठिकानों) को जीतकर एक अखंड राज्य बनाया जिसके बाद इस पूरे क्षेत्र को "गढ़वाल" नाम से जाना जाने लगा। ​राजधानी का स्थान परिवर्तन: चांदपुर गढ़ी 1488 ई. तक गढ़वाल राजवंश की पहली राजधानी रही इसके बाद राजा अजय पाल ने सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से राजधानी को देवलगढ़ और बाद में श्रीनगर (गढ़वाल) स्थानांतरित कर दिया। ​आदि बद्री धाम: चांदपुर गढ़ी से कुछ ही दूरी पर स्थित आदि बद्री मंदिर समूह पंच बद्री में से एक है पौराणिक मान्यता है कि कलयुग के अंत में जब बद्रीनाथ धाम (जोशीमठ) का मार्ग बंद हो जाएगा तब भगवान विष्णु की पूजा इसी आदि बद्री धाम में होगी