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अरे कोई न पूछा हाल दिल का | संत कबीर साहेब भजन | Kabir Bhajan 2026 | दर्द भरा निर्गुण भजन

KabirDivineOfficial

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अरे कोई न पूछा हाल दिल का | संत कबीर साहेब भजन | Kabir Bhajan 2026 | दर्द भरा निर्गुण भजन

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अरे कोई न पूछा हाल दिल का | संत कबीर साहेब भजन | Kabir Bhajan 2026 | दर्द भरा निर्गुण भजन कभी-कभी इंसान भीड़ में रहकर भी अकेला होता है… चेहरे बहुत मिलते हैं, लेकिन दिल का हाल पूछने वाला कोई नहीं मिलता। 💔 “अरे कोई न पूछा हाल दिल का” एक मौलिक, भावपूर्ण निर्गुण भजन है, जो मन के दर्द, झूठे रिश्तों, जीवन की सच्चाई और भीतर बसे परमात्मा की खोज का भाव प्रस्तुत करता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि दुनिया की दौड़ कितनी भी बड़ी हो, असली शांति अपने भीतर झाँकने और राम नाम का स्मरण करने में है। 🙏 अगर यह भजन आपके दिल को छू जाए तो वीडियो को Like 👍 करें, Comment में “राम” लिखें और Channel को Subscribe 🔔 जरूर करें। 🎵 Title अरे कोई न पूछा हाल दिल का | संत कबीर साहेब भजन | Kabir Bhajan 2026 | दर्द भरा निर्गुण भजन 🎶 Full Song Lyrics [Intro] अरे कोई न पूछा हाल दिल का, सबने पूछा हाल ज़माने का। भीड़ बहुत थी चारों ओर, पर कोई न मिला पहचानने वाला। हँसता रहा मैं जग के आगे, अंदर मन रोता रहा, जिसको अपना समझा था मैंने, वही मुझसे होता रहा पराया। अरे कोई न पूछा हाल दिल का, सबने पूछा हाल ज़माने का... [Verse 1] माटी का ये तन है बंदे, माटी में मिल जाना है, चार दिनों की रंगीन दुनिया, फिर किसका क्या रह जाना है। धन-दौलत सब यहीं पड़ेगी, महल यहीं रह जाएगा, जिसने मन को जीत लिया रे, वही पार उतर जाएगा। तूने जग को अपना माना, जग ने तुझको क्या माना? जिसके पीछे दौड़ रहा है, वो भी है पल भर का ठिकाना। अरे कोई न पूछा हाल दिल का, सबने पूछा हाल ज़माने का, मन के भीतर दीप जला ले, क्या रखा बाहर उजियारा करने में। [Chorus] ओ मनवा, अब लौट चल रे, अपने ही घर की ओर। झूठी दुनिया छोड़ दे बंदे, राम नाम का पकड़ ले छोर। जब कोई अपना साथ न देगा, नाम तेरा संग जाएगा, सांस-सांस में राम बसाले, मन का अंधेरा मिट जाएगा। अरे कोई न पूछा हाल दिल का, तू ही पूछ ले आज अपने दिल का, कितना दूर चला आया रे मनवा, भूल गया तू रास्ता अपने घर का। [Verse 2] रिश्ते सारे मेले जैसे, आते हैं और जाते हैं, मतलब की इस भीड़ में अक्सर, चेहरे बदलते जाते हैं। जिसे समझा था जीवन साथी, वो भी राह बदल सकता है, जिसे समझा अपना सहारा, वो भी हाथ छुड़ा सकता है। इसलिए किसी से बैर न रखना, किसी से मन न हार, जो मिला है उसको प्रेम दे दे, बाकी छोड़ दे संसार। मन के भीतर बैठा साहिब, उसे कहाँ तू ढूँढे रे? मंदिर-मस्जिद घूम रहा है, अपने घट को क्यों भूले रे? अरे कोई न पूछा हाल दिल का, तूने भी तो खुद से बात न की, दुनिया की आवाज़ सुनता रहा, अपने मन की सुनी एक रात न की। [Chorus] ओ मनवा, अब लौट चल रे, अपने ही घर की ओर। झूठी दुनिया छोड़ दे बंदे, राम नाम का पकड़ ले छोर। ना ऊँचा कोई, ना नीचा कोई, एक ही ज्योति समाई है, जिस घट भीतर प्रेम जगा है, वहीं सच्ची परछाई है। [Verse 3] कब तक अपनी पीड़ा छुपाए, कब तक झूठी हँसी हँसेगा? जिस दिन भीतर सच को देखे, उस दिन खुद से मिल जाएगा। तेरी आँखों के आँसू भी, किसी किताब के अक्षर हैं, हर दर्द तुझे कुछ कहता है, हर घाव में छिपे अवसर हैं। टूट गया तो टूटने दे मन, टूटे से ही राह बने, सूखी धरती जब रोती है, तब जाकर सावन बादल घने। दुनिया तुझको समझ न पाए, तू दुनिया को दोष न दे, जिसने तुझको जन्म दिया है, उस मालिक से रिश्ता जोड़ ले। कल की चिंता छोड़ मुसाफिर, आज का दीप जला, जिस पल में तू सांस ले रहा है, वही है सबसे सच्चा पल। [Bridge] एक दिन सब चुप हो जाएगा, तेरा मेरा नाम, न धन रहेगा, न मान रहेगा, बस रह जाएगा राम। उस दिन मत कहना देर हुई, आज ही भीतर झाँक, जिसको खोजे जग के अंदर, वो बैठा तेरे साथ। नयन बंद कर, मन शांत कर, सांसों में उसका ध्यान, बाहर जितना खोजेगा तू, उतना दूर लगे भगवान। [Verse 4] अरे कोई न पूछा हाल दिल का, अब खुद अपने मन को पूछ, किसके लिए ये दौड़ लगा रखी, किसके लिए ये झूठ? कल जिन हाथों ने ताली दी थी, कल वही हाथ छूटेंगे, जीवन की इस राह के साथी, एक-एक करके छूटेंगे। फिर भी डरना मत रे मनवा, अकेला तू नहीं, तेरी हर धड़कन के भीतर, साहिब की आवाज़ यहीं। प्रेम की गठरी साथ उठा ले, नफरत यहीं उतार, नाम की नाव बना ले बंदे, पार लगेगा संसार। [Final Chorus] अरे कोई न पूछा हाल दिल का, अब साहिब ने पूछ लिया, जिस दर्द को तू अपना समझा, उस दर्द ने तुझको जगा दिया। ओ मनवा, अब लौट चल रे, अपने ही घर की ओर, झूठे मेले छूट ही जाएंगे, राम नाम का पकड़ ले छोर। जब दुनिया तुझको भूल जाएगी, नाम तेरा रह जाएगा, जिस मन में प्रेम जगा होगा, वही मन घर बन जाएगा। [Outro] अरे कोई न पूछा हाल दिल का... फिर भी मन तू रोना मत... जिसे ढूँढता रहा जग सारा, वो तेरे भीतर सोना मत... सांस गई तो बात गई रे, समय किसी का ठहरा नहीं, आज मिला है जो अवसर तुझको, ऐसा पल फिर आए नहीं। मन ही मंदिर, मन ही रस्ता, मन ही सच्चा गाँव, अपने भीतर साहिब खोज ले, यही है अंतिम ठाँव। अरे कोई न पूछा हाल दिल का... अब तू खुद से पूछ ज़रा... किसको ढूँढे रे मनवा बाहर, जब साहिब बैठा तेरे ही घट में सदा... 🙏 Hashtags #KabirBhajan #KabirSaheb #KabirBhajan2026 #SantKabir #KabirDas #KabirVani #KabirAmritvani #NirgunBhajan #NirgunVani #KabirKeDohe #BhaktiBhajan #HindiBhajan #DardBharaBhajan #RamNaam #KabirSahib #SpiritualBhajan #DevotionalSong #Bhajan2026 #SantKabirSaheb #KabirVaani © Original Lyrics: यह गीत नए और मौलिक lyrics के रूप में तैयार किया गया है। किसी मौजूदा गीत की melody या lyrics की नकल न करें।