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ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत,

आत्मन भक्ति धारा

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ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत,

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आत्मन भक्ति धारा
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ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत, अद्भुत से भी अद्भुत है ।। ज्ञायक प्रभु का दर्शन कर ले जिसमें भरा हुआ सब सुख है । जिसकी महिमा के वर्णन में, भरा हुआ सब जिनश्रुत है। जिसको जाने बिना जगत में, ज्ञान कुमति अरु कुश्रुत है।। 1। ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत, अद्भुत से भी अद्भुत है ।। ज्ञायक प्रभु का दर्शन कर ले जिसमें भरा हुआ सब सुख है शक्ति अचिन्त्यमयी चिन्मूरति, निज प्रभुता से ही प्रभु है। सब भावों में व्यापक एक स्वभावमयी अच्युत विभु है।। ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत, अद्भुत से भी अद्भुत है ।। ज्ञायक प्रभु का दर्शन कर ले जिसमें भरा हुआ सब सुख है व्यय-उत्पाद सहज होते भी, एक रूप अविचल ध्रुव है। अहो ! अकर्त्ता और अवेदक, परम पारिणामिक प्रभु है ।। ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत, अद्भुत से भी अद्भुत है ।। ज्ञायक प्रभु का दर्शन कर ले जिसमें भरा हुआ सब सुख है जिसमें कुछ भी नहीं जरूरत, जो परिपूर्ण स्वयं ही है। समयसार कारण परमातम, आत्मन् ध्येय सु-एकहि है।। ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत, अद्भुत से भी अद्भुत है ।। ज्ञायक प्रभु का दर्शन कर ले जिसमें भरा हुआ सब सुख है एकहि दीखे सार जगत में, निरवलम्ब बस एकहि है। परभावों से मुक्त सदा ही, मम ज्ञायक प्रभु एकहि है।। ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत, अद्भुत से भी अद्भुत है ।। ज्ञायक प्रभु का दर्शन कर ले जिसमें भरा हुआ सब सुख है ।ज्ञायक रूप अनुपम अद्भुत, अद्भुत से भी अद्भुत है ।,,,