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Ghazal : Jab tak ye hont Lyrics : Dr Bhagia 'Khamosh' Music & Playback : Suno AI

Dr. Bhagia 'Khamosh'- Ghazal

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Ghazal : Jab tak ye hont Lyrics : Dr Bhagia 'Khamosh' Music & Playback : Suno AI

42 просмотра · 2 недели назад
Dr. Bhagia 'Khamosh'- Ghazal
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ग़ज़ल -ए - 'ख़ामोश' जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे तब तक दिलों के बीच कभी फ़ासिले न थे जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे सौग़ात उनको देता कोई प्यार की भी क्या सौग़ात उनको देता कोई प्यार की भी क्या अश्कों की झील में भी कंवल कुछ खिले न थे जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे मौसम के साथ साथ बदल क्यूँ गये सनम मौसम के साथ साथ बदल क्यूँ गये सनम बरसात के दिनों में तो उनको गिले न थे जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे आँखें मिलीं जब उनसे सरापा मैं हिल गया आँखें मिलीं जब उनसे सरापा मैं हिल गया पर हाथ भी मिलाने को उनके हिले न थे जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे जब साथ तुम थे मेरे, मेरा वक़्त थम गया जब साथ तुम थे मेरे, मेरा वक़्त थम गया 'ख़ामोश' रोज़ो-रात के ये सिलसिले न थे जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे तब तक दिलों के बीच कभी फ़ासिले न थे जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे -डॉ भागिया 'ख़ामोश'