Ghazal : Jab tak ye hont Lyrics : Dr Bhagia 'Khamosh' Music & Playback : Suno AI
Dr. Bhagia 'Khamosh'- Ghazal
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Ghazal : Jab tak ye hont Lyrics : Dr Bhagia 'Khamosh' Music & Playback : Suno AI
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Dr. Bhagia 'Khamosh'- Ghazal
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ग़ज़ल -ए - 'ख़ामोश'
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
तब तक दिलों के बीच कभी फ़ासिले न थे
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
सौग़ात उनको देता कोई प्यार की भी क्या
सौग़ात उनको देता कोई प्यार की भी क्या
अश्कों की झील में भी कंवल कुछ खिले न थे
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
मौसम के साथ साथ बदल क्यूँ गये सनम
मौसम के साथ साथ बदल क्यूँ गये सनम
बरसात के दिनों में तो उनको गिले न थे
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
आँखें मिलीं जब उनसे सरापा मैं हिल गया
आँखें मिलीं जब उनसे सरापा मैं हिल गया
पर हाथ भी मिलाने को उनके हिले न थे
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
जब साथ तुम थे मेरे, मेरा वक़्त थम गया
जब साथ तुम थे मेरे, मेरा वक़्त थम गया
'ख़ामोश' रोज़ो-रात के ये सिलसिले न थे
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
तब तक दिलों के बीच कभी फ़ासिले न थे
जब तक ये होंट कहने को कुछ भी हिले न थे
-डॉ भागिया 'ख़ामोश'