USA Rretreat -मानसिक चंचल विचारों को दूर करने की पाँच रणनीतियाँ
Dhamma Essence - Understanding Buddha Dhamma
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USA Rretreat -मानसिक चंचल विचारों को दूर करने की पाँच रणनीतियाँ
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USA Rretreat -" के अनुसार, बुद्ध द्वारा बताए गए वितक संतान सुत (Vitakkasanthana Sutta) में मानसिक चंचल विचारों (वितर्कों) को दूर करने की पाँच रणनीतियाँ (Five Strategies) निम्नलिखित हैं:
पहला कदम: निमित्त को हटाना (Substitution / प्रतिस्थापन): जब मन में कोई दुःखद या चिंताजनक विचार (जैसे नौकरी जाना, धन की हानि या कोई अन्य कष्ट) आए, तो उस निमित्त (विचार के विषय) को हटाकर किसी कुशल या अच्छे समय के निमित्त को याद करना चाहिए। गृहस्थों के लिए इसके दो चरण हैं—पहले किसी सुखद याद पर मन को टिकाना और फिर उसका अनित्य या अशुभ स्वभाव देखना। इसे एक निमित्त को दूसरे निमित्त से हटाना कहते हैं।
दूसरा कदम: दुष्परिणाम या खतरे को देखना (Adhinava / डेंजर): यदि अच्छे विचारों को लाने के बाद भी चंचल विचार नहीं रुकते हैं, तो उन विचारों के खतरे या दुष्परिणाम (आदीनव) को देखना चाहिए。 यह समझना कि इन विचारों के पीछे भागने से केवल दुःख ही मिलेगा। बुद्ध कहते हैं कि जैसे सिर पर साँप गिर जाने पर उसे तुरंत हटा दिया जाता है, वैसे ही इन विचारों को बढ़ते ही तुरंत काट देना चाहिए।
तीसरा कदम: नजरअंदाज करना (Ignore / इग्नोर करना): अकुशल विचारों को कोई महत्व या जगह न देना और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर देना। इसके लिए 6R तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, जिसमें विचार को पहचानकर उसे बस वेटिंग पर छोड़ दिया जाता है और उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती।
चौथा कदम: विचारों को शिथिल करना (Relax / रिलैक्स करना): विचारों की गति को शारीरिक मुद्राओं की तरह ही धीमा करना। जैसे तेज चलने से धीमा चलना, फिर खड़े होना, बैठना और अंततः लेट जाना। इसी तरह लंबी और धीमी सांसें लेकर अपने नर्वस सिस्टम को शांत (parasympathetic response) करना, जिससे मन का तनाव और विचारों की व्याकुलता शांत हो जाए।
पांचवां कदम: मन से मन को दबाना (बलपूर्वक रोकना): यदि ऊपर दिए गए चारों तरीके काम न करें, तो अपनी पूरी मानसिक शक्ति से उस विचार को बलपूर्वक रोक देना चाहिए। बुद्ध इसका उदाहरण देते हैं कि जैसे एक शक्तिशाली व्यक्ति किसी कमजोर व्यक्ति की गर्दन पकड़ लेता है, वैसे ही इस वितर्क को जकड़ लेना चाहिए ताकि वह आगे न बढ़ सके। यह सामान्य लोगों के लिए काफी कठिन होता है, लेकिन इसके बाद मन सीधे समाधि (द्वितीय ध्यान) की ओर बढ़ सकता है।