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सलीब-ए-इश्क़ II Superhit Qawwali- 2026 II Prabhu Ne kaha II

PRABHU NE KAHA

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सलीब-ए-इश्क़ II Superhit Qawwali- 2026 II Prabhu Ne kaha II

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Dear friends, Welcome to PRABHU NE KAHA On this channel, you will find: ✦Biblical Reflections Thought-provoking reflections and teachings from Sacred Scripture that inspire faith, offer hope, and help you apply God's Word in your daily life. ✦ Hindi Christian Devotional Songs Soul-stirring worship songs and heartfelt devotional music that draw you closer to Jesus and encourage a life of prayer and praise. Whether you are searching for hope, seeking spiritual growth, or simply longing to spend time in God's presence, we pray that every video becomes a source of encouragement and blessing. This channel is created not for commercial purposes, but to glorify Jesus Christ by proclaiming His Word through biblical reflections and devotional music. Our prayer is that every message and every song will strengthen your faith, nourish your spirit, and lead you into a deeper relationship with our Lord and Savior, Jesus Christ. ...................................................................................... This song is created by suno ai Lyrics: Fr. Devarchan IMS ..................................................................................... सलीब-ए-इश्क़ या मसीहा... या मसीहा... मेरे मसीहा... मेरे मसीहा... तेरे इश्क़ में जो मिट गया, वो कभी फ़ना नहीं हुआ... तेरी सलीब को जिसने छुआ, उसका दिल फिर तन्हा नहीं हुआ... सलीब-ए-इश्क़... सलीब-ए-इश्क़... मेरी रूह का नूर है... सलीब-ए-इश्क़... सलीब-ए-इश्क़... मेरी नजात का दस्तूर है... सलीब-ए-इश्क़ पे मसीहा, मोहब्बत लुटाते रहे... अपने ज़ख़्मों से दुनिया के, ज़ख़्मों को भरते रहे... हाय रे इश्क़... हाय रे इश्क़... क्या तेरी शान है! सलीब पे मसीहा का, इश्क़ ही इम्तिहान है! काँटों का ताज था सर पर, लब पर कोई शिकवा नहीं, ज़ुल्मत थी चारों ओर मगर, दिल में कोई शिकवा नहीं। जिन हाथों ने ज़ख़्म दिए, उनके लिए भी दुआ की, ऐसा इश्क़ कहाँ देखा हमने, ऐसी कैसी वफ़ा की। वाह मसीहा... वाह मसीहा... तेरा करम निराला है, जिसने तुझको दर्द दिया, तूने उसको भी संभाला है। सलीब-ए-इश्क़... सलीब-ए-इश्क़... तेरे लहू की हर बूँद में, रहमत का पैग़ाम मिला, टूटी हुई मेरी रूह को, तेरा ही नाम मिला। मैं दर-दर भटका दुनिया में, मिला न कोई ठिकाना, सलीब के साये में आकर, मिला मुझे आशियाना। नूर मिला, सुरूर मिला, दिल को नया हुज़ूर मिला, तेरी क़ुर्बानी के दर से, मुझको अपना गुरूर मिला। हक़ मसीहा! — हक़ मसीहा! इश्क़ मसीहा! — इश्क़ मसीहा! सलीब पे इश्क़ लिखा गया! इश्क़ लिखा गया! दर्द में नूर मिला! नूर मिला! मौत में जीवन मिला! जीवन मिला! गुनाहों को नजात मिली! नजात मिली! कौन है ऐसा आशिक़? मसीहा! मसीहा! कौन है ऐसा रहमत वाला? मसीहा! मसीहा! मैं क्या लाया तेरे दर पर, बस अश्क़ों की सौग़ात है, मेरे दिल की हर धड़कन में, तेरी ही तो बात है। न सोना माँगूँ, न चाँदी, न दुनिया की दौलत चाहूँ, तेरी सलीब के साये में, बस तेरा दीदार चाहूँ। मेरी फ़रियाद तू, मेरी इल्तिज़ा तू, मेरी बंदगी तू, मेरी दुआ तू। सलीब-ए-इश्क़... सलीब-ए-इश्क़... तेरे दर से खाली कौन गया? जिसने सज्दा किया तेरे आगे, उसके दिल का अँधेरा खो गया। सलीब-ए-इश्क़... सलीब-ए-इश्क़... तेरा नूर बरसता जाए... हर टूटा दिल तुझमें आए, हर रोती रूह मुस्काए। सलीब हमारी शान है! शान है! सलीब हमारी जान है! जान है! सलीब में तेरी रहमत है! रहमत है! सलीब में मेरी नजात है! नजात है! तेरा इश्क़ ही मेरा ईमान, तेरा नाम ही मेरी पहचान, सलीब-ए-इश्क़ के साये में, मेरा मसीहा, तू ही मेरी जान! या मसीहा... या मसीहा... तेरे इश्क़ में हम फ़ना... सलीब-ए-इश्क़! सलीब-ए-इश्क़! सलीब-ए-इश्क़! मसीहा... मसीहा... मसीहा...