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जौनसारौ भीम बल मि क्य छौं New Garhwali Song Puzzles 1240 Jagmohan Singh Rawat Jagmora

Jagmora Garhwali Puzzles song

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जौनसारौ भीम बल मि क्य छौं New Garhwali Song Puzzles 1240 Jagmohan Singh Rawat Jagmora

2 057 просмотров · 3 месяца назад
Jagmora Garhwali Puzzles song
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जौनसारौ भीम बल मि क्य छौं New Garhwali Song Puzzles 1240 Jagmohan Singh Rawat Jagmora Lyrics: जौंसार बावरा जवान तुम जुगराज रयां किसान क्वानू रतन सिंग चौहान तुम जुगराज रयां भग्यान महासू पायो जि हमुना बल राम रतन धन पायो जौनसार बावर यमुना रतन सिंग चौहान पायो जु नंतराम नेगी पायो त केसरी चंद भी पायो भीम राव अंबेडकर जन रतन सिंग जौंसारी पायो जु बल बच्यूं रालो लाटो वु बल खैंडि खालो माटो बल जै जवान जै किसान तुम जुगराज रयां महान कोटद्वार भाबरा हाथी जौनसार बावरा साथी जनजाति दलिता उतथान तुम जुगराज रयां जजमान जो बल अफी तैं जज मान त वो बल क्यांको जजमान अफी औतरी अफी पुजरी त वो बल क्यां को चौहान बल द्यब्ता महासू पूजी मिन दलिता आंसू फूंजी जनजाति कु भाग जगैकी मिन सिरमौरी सासू पूजी क्वानू मझगांव कु प्रधान नंदी जंवै रतनों कि खान मि घरगुदड्या किसान छौं जौनसारौ भीम मि क्य छौं? शब्दार्थ/भावार्थ जौनसार बावर क्षेत्र के जवान, तुम जुगराज (सदाबहार) रहें किसान, क्वानू (मझगांव खत पशगांव, जौनसार) के रतन सिंह चौहान (नोट-३), तुम जुगराज सदाबहार रहें भग्यान (भगवान को प्रिय होने वाले)। महासू देवता पायो जी हमुना (हमने), बल राम रतन धन पायो, जौनसार बावर यमुना (मोक्षदायिनी नदी), रतन सिंह चौहान पायो। जो वीर नंतराम नेगी (जौनसार के खत पशगांव के मलेथा गांव की वीर सिपाही, जिन्होंने मुगल सेनापति का सिर काटकर सिरमौर राज्य को बचाया, जिसके एवज में सिरमौरी राजा ने उन्हें गुलदार की उपाधि से नवाजा) पायो, तो केसरी चंद (जिन्हें अंग्रजों के विरुद्ध लड़ने के कारण 3 भी, 1945 को दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के फांसीगृह में फांसी दी गई, जिनका स्मारक स्थल चौलीथात के रामताल गार्डन में है) भी पायो, भीम राव अंबेडकर जैसा (जिन्होंने दलित एवं जनजाति के उत्थान के लिए संवैधानिक रूप से आरक्षण का दर्जा दिलवाया), रतन सिंह जौनसारी (नोट-४) पायो‌। कहावत अनुसार जो बल बचा रहेगा लाटो (भोला-भाला बेटा), वह बल खैंडि (खोदकर) खायेगा माटो (माटी), यानी माटी/गुदड़ी का लाल मेहनत करके अपना जीवनयापन कर ही लेगा। बल जय जवान जय किसान (देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिया गये नारे के अनुसार), तुम जुगराज सदाबहार रहें महान। जौनसारी बावर क्षेत्र विशेष की 16 पजल धाम की यात्रा के संदर्भित जगमोरा नवसृजित गढ़वाली कहावत के अनुसार कोटद्वार भाबर (मैदानी क्षेत्र) के हाथी, जौनसार बावर के साथी (हाथी मेरे साथी जैसे विश्वसनीय)। जनजाति दलित समाज के उतथान (उत्थान), तुम जुगराज सदाबहार रहें जजमान (देवताओं को पूजने वाले भक्तगण)। जो बल खुद को जज मान (माने), तो वह बल क्यांको (किस बात) का जजमान? अफी (खुद ही) औतरी (देवता का अवतारी पश्वा/ डांगर/ माली) अफी (खुद) ही पुजारी, यानी कहावत अनुसार खुद ही सर्वेसर्वा, तो वह बल क्यां को (किस बात का) चौहान (यानी चौ-हां, जिसकी चंहुओर हां यानी हाम हो, जो जमीन से जुड़ा हुआ जन-जन का नेता हो)। बल देवता महासू महाराज पूजे, मिन (मैंने यानी अमुक) ने दलितों के आंसू फूंजे (पोंछे), जनजाति के भाग जगाकर, मिन (मैंने यानी अमुक) ने सिरमौरी सासू (सास) पूजी। अंत में अमुक पहेलीनुमा प्रश्नात्मक शैली में कहता और पूछता है कि‌‌ बल क्वानू मझगांव का प्रधान, नंदी का जंवै (पतिदेव) रतनों की खान, मैं (वह अमुक) घरगुदड्या (माटी का लाल) किसान है, तो बताओ कि तथाकथित जौनसार का भीम (यानी दलित एवं जनजाति समाज के संवैधानिक उत्थान की बात करने वाला युग पुरुष) बल वह क्या है?