Перейти к содержимому

ग़ज़ल - मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर! रचना -"लक्ष्य जयपुरिया" एल पी शर्मा, जयपुर - राज.

Lakshya Jaipuria L P Sharma

0:00 / 0:00

ग़ज़ल - मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर! रचना -"लक्ष्य जयपुरिया" एल पी शर्मा, जयपुर - राज.

67 просмотров · 6 дн. назад
Lakshya Jaipuria L P Sharma
83 подписчика
67 просмотров · 6 дн. назад
ग़ज़ल ! [Verse 1] मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर! प्यार का कतरा तक, वजूदे-जिंदगी में ना रहा। क्यों ग़मज़दा तरबतर, क्या आज मरे हैं हम तेरे, हम मर गये तभी, जब हाल जानने वाला ना रहा। मैंने करवट क्या ली, नींद की मदहोश हालत में, लोग मुर्दा समझ, पढ़ बैठे फ़ातिहा, मैं देखता रहा। [Chorus] मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर, प्यार का कतरा तक, वजूदे-जिंदगी में ना रहा। [Verse 2] दिल की खूबी यही, जहाँ दर्द मिले, वहीं बसता, जो नाक़ाबिले-हुसूल, उसी की ख़्वाहिश रखता। बंदिशों से दूर, न शाहे-जलाल का ख़ौफ़, प्रेम से सूली पर चढ़ता, बे-झिझक, बे-ख़ौफ़। [Chorus] मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर, प्यार का कतरा तक, वजूदे-जिंदगी में ना रहा। [Verse 3] अच्छा पाने की चाहत में, बेहतर को खो देता है, यह दिल बड़ा नादाँ, उलझा-उलझा सा रहता है। ज़िंदगी बेमक़सद हुई, दीदार-ए- हँ-नफ़स बिना, अब चैन से सोने दे मुझे, तन्हाई में तन्हा-तन्हा। [Chorus] मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर, प्यार का कतरा तक, वजूदे-जिंदगी में ना रहा। [Outro] हम मर गये तभी, जब याद करने वाला ना रहा, मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर! मेरी कब्रगाह में आकर, कोई क्यों रोये आखिर! " लक्ष्य जयपुरिया " ( एल पी शर्मा ) जयपुर - राज . Copyright Disclaimer लेखक - लक्ष्मी प्रसाद शर्मा “ लक्ष्य जयपुरिया “, प्रकाशन वर्ष,19 अक्टूबर 2026 , यह सामग्री मूल है कॉपीराइटेड है और अनुमति के बिना अनधिकृत उपयोग वर्जित है ! Laksh