#013 “श्रीकृष्ण – लीला पुरुषोत्तम भगवान | दिव्य लीलाओं का अमृत | Book Reading
“Cheto Darpan Marjanam – 🙏@SNGM Banglore
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#013 “श्रीकृष्ण – लीला पुरुषोत्तम भगवान | दिव्य लीलाओं का अमृत | Book Reading
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आज का सारांश - श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम भगवान
गर्गमुनि द्वारा नामकरण संस्कार
गर्गमुनि ने नन्द महाराज की गोशाला में गुप्त रूप से श्रीकृष्ण और बलराम का नामकरण संस्कार किया। उन्होंने रोहिणी-पुत्र के लिए राम, बलराम तथा संकर्षण नाम बताए। श्रीकृष्ण के अलग-अलग युगों में अलग-अलग वर्ण धारण करने की बात बताते हुए उन्होंने उन्हें वासुदेव का पुत्र होने के कारण वासुदेव तथा श्रीकृष्ण नाम से पुकारे जाने की बात कही। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि श्रीकृष्ण आगे चलकर अनेक अद्भुत लीलाएँ करेंगे और बलराम के साथ वृन्दावनवासियों को दिव्य आनंद प्रदान करेंगे।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ
श्रीकृष्ण और बलराम अपने मित्रों के साथ विभिन्न बाल-लीलाएँ करते हुए बड़े होने लगे। उनकी लीलाओं से व्रजवासी अत्यंत आनंदित होते थे। श्रीकृष्ण की बाल-सुलभ शरारतों में भी उनकी अद्भुत दिव्यता प्रकट होती थी।
मिट्टी खाने की लीला
एक दिन श्रीकृष्ण अपने मित्रों के साथ खेल रहे थे। बालकों ने यशोदा माता से शिकायत की कि श्रीकृष्ण ने मिट्टी खाई है। माता यशोदा ने श्रीकृष्ण से मुँह खोलकर दिखाने को कहा। श्रीकृष्ण ने मुँह खोला तो माता यशोदा ने उसमें सम्पूर्ण सृष्टि का दर्शन किया—आकाश, पर्वत, समुद्र, ग्रह, वायु, अग्नि, चन्द्रमा, नक्षत्र तथा विभिन्न भौतिक और आध्यात्मिक तत्व दिखाई दिए।
यशोदा माता का आश्चर्य
माता यशोदा ने श्रीकृष्ण के मुख के भीतर सम्पूर्ण दृश्य जगत को देखा। उन्हें समझ नहीं आया कि यह स्वप्न है, भगवान की माया है या उनके पुत्र की कोई अद्भुत योगशक्ति। उन्होंने भगवान को नमस्कार किया और उनकी शक्ति के सामने अपनी मानसिक तथा दार्शनिक कल्पनाओं को नगण्य माना।
नन्द महाराज और यशोदा का दिव्य सम्बन्ध
ब्रह्माजी के वरदान के फलस्वरूप श्रीकृष्ण नन्द महाराज और माता यशोदा के पुत्र के रूप में प्रकट हुए। नन्द महाराज तथा यशोदा माता ने श्रीभगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करके अपनी शुद्ध भक्ति को बढ़ाया। सभी गोप-गोपियों ने भी श्रीकृष्ण के प्रति अपना प्रेम विकसित किया।
विराट रूप का दर्शन
श्रीकृष्ण की इस लीला में माता यशोदा को उनके मुख के भीतर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का दर्शन हुआ। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल-लीलाओं के माध्यम से यह प्रकट किया कि वे साधारण बालक नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के आधार हैं।
हरे कृष्ण 🙏