सुमाड़ी पंथ्यरो Sumadi Panthyoro | बल मि क्य छौं? |New Garhwali Song Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
Jagmora Garhwali Puzzles song
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सुमाड़ी पंथ्यरो Sumadi Panthyoro | बल मि क्य छौं? |New Garhwali Song Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
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सुमाड़ी पंथ्यरो Sumadi Panthyoro || बल मि क्य छौं? || New Garhwali Song || Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
सुमाड़ी का बुलख्या दादा
जुगजुग जियां पंथ्या दादा
फरासू का हल्या दादा
जुगजुग जियां पंथ्या दादा
सुमाड़ी की गौरा देवी
जुगजुग पुज्यां भद्रा देवी
फरासू की नंदा देवी
जुगजुग पुज्यां कीर्ति देवी
बल सुमाड़ी का नंदी बल्द
पढ्यां लिख्यां नीहोंदा मर्द
ता गंगाड़ी का नंदा भक्त
बलिदानी नी होंदा मर्द
बडखुलौ हाथी निरदुद्धौ
श्रीनगरौ रज्जा परबुद्धौ
सुमाड़ी सुखराम काला
जुगजुग जियां पंथ्या दादा
मेदनीशाह मौ तिरावा
पर कती नी गौं तिरावा
नथीर अत्ती जौबल खत्ती
ह्वै जावा बलिदानी सती
सुमाड़ी इकरज्जा अकरू
बणांद हैंकु रज्जा अकड़ू
सुमाड़ी सरोला दादा
जुगजुग जियां पंथ्या दादा
गौं छुडण से रोजा भलो
मौ टुटण से रोजा भलो
सुमाड़ी का मौळ खादा
जुगजुग जियां पंथ्या दादा
असगुन बौड़ि रज्जा डौरी
घड्यालो मा अकरु कौरी
मैं एक पंथ द्वी काजा छौं
सुमाड़ी पंथ्यरो बल क्यछौं?
शब्दार्थ/भावार्थ
सुमाड़ी गांव (उत्तराखंड के पौड़ी जिले के देवलगढ़ परगने की कटुलस्यूं पट्टी के अंतर्गत श्रीनगर के गोलार्क्ष पर्वत में गौरा देवी स्वरूपा गोलार्क्ष माता के धाम में अवस्थित मुख्यतः काला सलोला ब्राह्मणों का एक सुप्रसिद्ध गांव जहां की एक कहावत प्रचलित है कि सुमाड़ी के मर्द क्या? बैल भी पढ़े-लिखे होते हैं) के बुलख्या (दवात पाटी की पौराणिक परिपाटी में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाला) दादा (भाई/दादा), जुगजुग जियें पंथ्या दादा (नोट -३, श्रीनगर राजा के करभार यानी 'रोजा' के खिलाफ लड़कर बलिदानी हुये, उनके साथ -साथ उनकी बहन फरासू की कीर्ति देवी और सुपाड़ी की चाची भद्रा देवी ने भी उसी अग्निकुंड में आत्मदाह किया, नोट-३)। फरासू (श्रीनगर से 7 किलोमीटर की दूरी पर दो पड़ावों जुगपठ्याली और सौड़ से होते हुए रुद्रप्रयाग की ओर बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर अवस्थित, सुमाड़ी के पंथ्या दादा की बहन कीर्ति का ससुराल जहां अनाथ होने पर पंथ्या दादा पल बढ़ रहे थे) के हल्या (हलधल किसान) दादा, जुगजुग जियें पंथ्या दादा। सुमाड़ी गांव की गौरा देवी (गोलार्क्ष माता), जुगजुग पुजे जायें भद्रा देवी (पंथ्या दादा की भाभी, जो पंथ्या दादा और कीर्ति ननद के साथ बलिदानी हुई), फरासू गांव की नंदा देवी, जुगजुग पूजे जायें कीर्ति देवी (पंथ्या दादा की बहन जो पथ्यां दादा और चाची भद्रा के साथ बलिदानी हुई)।
कहावत अनुसार बल सुमाड़ी गांव के नंदी बल्द (बैल), पढ़े लिखे (जागृत) नहीं होते मर्द, तो गंगाड़ी (गंगा तटीय क्षेत्र) के नंदा (देवी) के भक्त, बलिदानी नहीं होते मर्द। देहरादून के निकट बडखुला के कहावत अनुसार हाथी निरदुद्धौ (बगैर दूध) के, होते हैं श्रीनगर के राजा परबुद्धौ (पराई बुद्धि यानी वजीरों की सलाह पर चलने वाले होते हैं), तो सुमाड़ी गांव के संस्थापक सुखराम काला (जिन्हें बावन गढ़ के संस्थापक राजा अजयपाल ने अपनी राजधानी चांदपुर से देवलगढ़ स्थांतरित करते वक्त कर-मुक्त भूमि सुपाड़ी में दी थी, जहां एन आई टी स्थापित हो रहा है), जुगजुग जियें पंथ्या दादा।
कहावत अनुसार भिखारी मेदनिशाह (निरंकुश राजा, जिसने अन्य वजीरों के भड़काने में आकर सुमाड़ी पर सबसे अधिक कर का बोझ लाद दिया, और ऐलान कर दिया कि कर की नाफरमानी पर या तो रोजा, यानी रोजाना नरबलि, दो वरना गांव छोड़ दो) को मौ (परिवार) तिरावा (छोड़ना/का तिरस्कार करना), पर कतई नहीं गौं (गांव) तिरावा (छोड़ना/का तिरस्कार करना), नथीर (नहीं तो) कर्मकांडों में कहावत अनुसार अत्ती जौ बल खत्ती (बरबाद), हो जावे बलिदानी सती (यानी पंथ्या दादा के आत्मदाह के बाद उसी अग्निकुंड में बहन कीर्ति देवी और चाची भद्रा सती हुई, जानकी प्रेतात्माओं की शांति हेतु रडोला जाति के लोग घड्याला लगाते हैं, और तीनों के पश्वाओं को नचाकर धुपाणा सुंघाकर शांत करते हैं)। सुमाड़ी को एक राजा (अजयपाल) अकरू (सुपाड़ी गांव को कर-मुक्त), बनाता है हैंकु (दूसरा) राजा (मेदनीशाह) अकड़ू (कर लगाकर अकड़े), तो सुमाड़ी के सरोला काला (रसोइया ब्राह्मण जाति, जो विधि विधान के साथ सामुहिक अवसरों पर राजभोग बनाते हैं), जुगजुग जियें पंथ्या दादा।
पंथ्या दादा के अनुसार गांव छोड़ने से रोजा (रोजाना नरबलि) भली, परिवार टूटने से रोजा (आत्मदाह) भला, तो सुमाड़ी गांव के मौळ (गोबर) खाद (यानी बलिदानी सुमाड़ी को अपनी पंचतत्व खाद से पोषित /उपजाऊ कर गये, फलस्वरूप सुमाड़ी गांव पूरे क्षेत्र में सबसे समृद्ध गांव हुआ, गांव के पढ़े-लिखे लोग आई ए एस जैसे कई अनेकों महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर सुशोभित हुये), जुगजुग जियें पंथ्या दादा। अंत में अमुक पहेलीनुमा प्रश्नात्मक शैली में कहता और पूछता है कि बल बलिदान के तद्पश्चात राजा के जीवन में असगुन बड़े राजा डौरी (डरा), घड्यालो (मृतात्माओं की शांति हेतु धुपाणो यानी पूजा अर्चना) में अकरु (सुमाड़ी गांव को कर-मुक्त) कौरी (किया), तो मैं (वह अमुक) कहावत अनुसार एक पंथ दो काज का (एक ही प्रयास या काम से दो लाभ देने वाला) है, तो बताओ कि तथाकथित सुमाड़ी गांव का पंथ्यरो (पंथ्यरो, यानी पथ-प्रदर्शक, जगमोरा नवसृजित गढ़वाली शब्द) बल वह क्या है?