#703. ज्ञान-ज्ञेय का आधार और आधेय/ 09.09 दोपहर/ त्यागी विद्यालय
Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji
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#703. ज्ञान-ज्ञेय का आधार और आधेय/ 09.09 दोपहर/ त्यागी विद्यालय
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ज्ञान का ज्ञेय बनाते चलो, समता भाव बढ़ाते चलो।
मार्ग में आवें संकल्प-विकल्प, सबको ही पर में खपाते चलो ।। टेक ।।
सच्चे देव-गुरु-जिन आगम, प्रयोजनभूत तत्त्व परखो।
शुद्ध निरंजन आत्म स्वरूप, सच्चिदानंद प्रभो निरखो ।। स्वातम में दृष्टि लगाते चलो।। 1।।
वस्तु न कोई इष्ट-अनिष्ट, राग अरु द्वेष मिटाओ।
अत्यंताभाव सदा ही पर में, व्यर्थ न दोष लगाओ ।।
स्व-पर विवेक जगाते चलो ।। 2।।
मैं ज्ञायक पर ज्ञेय हैं मेरे, पर में ज्ञान बहाया।
नहीं अभी तक शुद्ध निजातम, ज्ञान का ज्ञेय बनाया।।
निज में ही निज को लखाते चलो ।। 3 ।।
जब उपयोग न ठहर सके तब, आत्म भावना करना।
शक्ति अनंत निज में विचारी, अति उछाट उर धरना।।
निज में ही पुनि-पुनि रमाते चलो ।। 4 ।।
बाधाओं को नहीं निरखना, ये खुद ही हट जायें।
पुण्य प्रलोभन में नहिं फँसना, ये गति-गति भटकाएं ।। पुरुषार्थ सम्यक् बढ़ाते चलो ।। 5।।
मोहीजन बहु भरमायेंगे, इनकी बात न सुनना ।
कौन कर सका जग को राजी, व्यर्थ विकल्प न करना।।
शिव पथ में चरण बढ़ाते चलो ।। 6 ।।
पर्यायों में भटक न जाना, ये तो आनी जानी।
इनतें भिन्न चिन्मूरति, निश्चय सिद्ध समानी ।।
सहज आनन्द मनाते चलो ।। 7।।