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सबने कहा दादाजी भूलने लगे हैं… लेकिन गलती हमारी थी

न्याय की कहानियाँ (My decision)

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सबने कहा दादाजी भूलने लगे हैं… लेकिन गलती हमारी थी

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न्याय की कहानियाँ (My decision)
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बीकानेर में रहने वाले 74 साल के हरीश शर्मा एक रिटायर्ड भूगोल शिक्षक हैं। उन्हें आज भी शहर के रास्ते, पुरानी गलियाँ और ज़रूरी तारीखें अच्छी तरह याद रहती हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से घरवाले बार-बार कहने लगे हैं कि अब दादाजी बातें भूलने लगे हैं। कभी किसी कार्यक्रम का समय बदल जाता है, कभी मिलने की जगह। और हर बार गलती हरीश जी की याददाश्त पर डाल दी जाती है। धीरे-धीरे वह खुद भी अपनी याददाश्त पर शक करने लगते हैं। फिर एक रविवार परिवार घूमने निकलता है और हरीश जी अकेले एक ऐसी जगह इंतज़ार करते रह जाते हैं, जहाँ अब कोई आने वाला ही नहीं। आखिर गलती किसकी थी? यह कहानी बुज़ुर्गों के सम्मान, परिवार में बातचीत और उन छोटी-छोटी गलतियों की है, जो अपनों के बीच बड़ी दूरी पैदा कर देती हैं। यह एक मौलिक काल्पनिक कहानी है।