Перейти к содержимому

श्री पार्श्वनाथ भगवान स्तोत्रम् | जय जय श्री पार्श्वनाथ | मोक्ष कल्याणक महोत्सव विशेष

Jinbhakt

0:00 / 0:00

श्री पार्श्वनाथ भगवान स्तोत्रम् | जय जय श्री पार्श्वनाथ | मोक्ष कल्याणक महोत्सव विशेष

104 просмотра · 4 недели назад
Jinbhakt
206 подписчиков
104 просмотра · 4 недели назад
🙏 जय जिनेन्द्र 🙏 भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के पावन मोक्ष कल्याणक महोत्सव को समर्पित यह दिव्य संस्कृत स्तोत्र उनकी अनंत करुणा, अहिंसा, वीतरागता, तप, केवलज्ञान और मोक्ष महिमा का भावपूर्ण गुणगान है। भगवान पार्श्वनाथ, जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर, अनंत जीवों के कल्याणकारी, करुणा और क्षमा के साक्षात् प्रतीक हैं। कमठ के घोर उपसर्गों को समभाव से सहन कर उन्होंने संसार को धैर्य, क्षमा और आत्मबल का अमर संदेश दिया। धरणेन्द्र और पद्मावती की कथा हो या सम्मेद शिखर से मोक्ष की दिव्य यात्रा—भगवान पार्श्वनाथ का सम्पूर्ण जीवन भक्ति, तप और आत्मजागरण की प्रेरणा देता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से पार्श्वनाथ प्रभु के दिव्य गुणों का स्मरण कराते हुए हमें भी सम्यग्दर्शन, संयम और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। पार्श्वनाथ प्रभु की कृपा से हमारे जीवन में भी शांति, करुणा और आत्मकल्याण का प्रकाश फैले। 📜 Lyrics: जय जय श्री पार्श्वनाथ, सम्मेद-शिखर-विराजितम्। पावन-गुण-गण-सागरं, पार्श्व-जिनवरं भजाम्यहम्॥ श्रीमत्-सम्मेद-शिखरे, ध्यान-लीनं जिनेश्वरम्। कर्म-शत्रु-विनाशार्यं, पार्श्वनाथं नमाम्यहम्॥ वाराणसी-समुद्भूतं, वामा-अश्वसेन-नन्दनम्। नागफण-च्छत्र-शोभाढ्यं, मोक्ष-मार्ग-प्रदर्शकम्॥१॥ अहिंसा-धर्म-दातारं, प्राणिनां अभय-प्रदम्। कमठ-उपसर्ग-विजेतारं, वन्देऽहं पार्श्व-भास्करम्॥ घातिया-कर्म-निर्मुक्तं, केवलज्ञान-भास्वरम्। संसार-दुःख-संहर्तारं, सम्मेद-शिखर-भूषितम्॥२॥ नील-वर्ण-तनु-कान्तिं, शंख-लांछन-लक्षितम्। सर्व-जीव-दया-मूर्तिम, दया-सिंधुं कृपानिधिम्॥ त्रि-ज्ञान-धारी बालेऽपि, त्यागी राज्य-सुखं महत्। वैराग्य-भावना-पूर्णं, वन्दे पार्श्वं महा-मुनिम्॥३॥ कमठस्य महा-घोरं, उपसर्गं सहन् विभुः। समता-भाव-योगेन, शत्रु-मित्र-सम-प्रियम्॥ धरणेन्द्र-पद्मावतीभ्यां, पूजितं चरण-द्वयम्। शान्ति-दं सर्व-लोकानां, पार्श्वनाथं नमाम्यहम्॥४॥ समवसरण-लक्ष्मी-ढ्यं, चारु-रूपं मनोहरम्। चतुः-षष्टि-सुरेन्द्रैश्च, पूजितं मोक्ष-दायकम्॥ अष्ट-महा-प्रातिहार्यैः, शोभितं जिन-पुंगवम्। धर्म-चक्र-प्रवर्तकं, स्तौमि पार्श्वं जगत्-पतिम्॥५॥ संसार-कूप-पतितानां, हस्त-आलम्बन-दायकम्। मोह-अन्धकार-नाशाय, ज्ञान-दीपं प्रकाशकम्॥ भव-भ्रमण-विनाशाय, शरणं तव आगतः। पाप-ताप-हरं देवं, पार्श्वनाथं नमाम्यहम्॥६॥ ज्ञान-भास्कर-रूपाय, अज्ञान-तिमिर-घातिने। सर्व-ज्ञाय सु-शुद्धाय, पार्श्वनाथाय ते नमः॥ परम-ध्यान-रताय च, मोक्ष-सौख्य-प्रदायिने। सम्मेद-शिखर-वासाय, पार्श्वनाथाय ते नमः॥७॥ अहिंसा-परमो-धर्मः, येन लोके प्रचारितः। सत्यं शौचं दया क्षान्तिः, यस्य जीवन-दर्शनम्॥ तस्मै नमो विशुद्धाय, पार्श्वनाथाय धीमते। यस्य शासन-माश्रित्य, यान्ति जीवाः परां गतिम्॥८॥ स्वर्णभद्र-कूटे रम्ये, सिद्धं पार्श्व-जिनेश्वरम्। कोटि-सूर्य-सम-प्रभं, वन्देऽहं भव-तारकम्॥ अष्ट-कर्म-क्षयं कृत्वा, प्राप्तवान् परमं पदम्। लोकाग्र-शिखरे जातं, पार्श्वनाथं नमाम्यहम्॥९॥ इति पार्श्व-प्रभोः स्तोत्रं, भक्ति-भावेन यः पठेत्। श्रृणोति वा महा-पुण्यं, सर्व-काम-प्रदायकम्॥ स सर्व-पाप-निर्मुक्तः, सर्व-सौख्य-समन्वितः। अन्ते च लभते सिद्धिं, पार्श्वनाथ-प्रसादतः॥१०॥ जय जय श्री पार्श्वनाथ, सम्मेद-शिखर-विराजितम्। पावन-गुण-गण-सागरं, पार्श्व-जिनवरं भजाम्यहम्॥ यदि यह प्रस्तुति आपको पसंद आए तो LIKE, SHARE और COMMENT अवश्य करें तथा JinBhakt चैनल को SUBSCRIBE करना न भूलें। #Parshvanath #ParshwanathBhagwan #ParshvanathStotra #ParshwanathStuti #MokshaKalyanak #ParshvanathMokshaKalyanak #SammedShikharji #JainStotra #JainBhakti #JinBhakt #DigambarJain #Jainism #SanskritStotra #Dharnendra #Padmavati #Jinvani #Tirthankar #JainFestival #BhaktiGeet #MokshaMahotsav