जीवन की दुर्लभता से भगवान महावीर के उपसर्गों तक | उत्तराध्ययन सूत्र अध्याय 3-4 |
Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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जीवन की दुर्लभता से भगवान महावीर के उपसर्गों तक | उत्तराध्ययन सूत्र अध्याय 3-4 |
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Sadhvi Dr. Sarita Ji Maharaj
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सम्यक्त्व से सिद्धत्व की यात्रा भाग 15
📖 उत्तराध्ययन सूत्र — तृतीय एवं चतुर्थ अध्याय
🙏 आज के प्रवचन में जानिए धर्म, जीवन-संस्कार और भगवान महावीर की अद्भुत साधना यात्रा के अनमोल रहस्य।
जीवन में कौन-कौन सी चीजें दुर्लभ हैं? दुर्लभ अवसरों को प्राप्त करके भी यदि हम अपने जीवन को संस्कारित नहीं करते, तो आगे चलकर किस प्रकार पछताना पड़ता है? जीवन को सुसंस्कृत बनाने के लिए हमें कौन-से प्रयास करने चाहिए? इन महत्त्वपूर्ण प्रश्नों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
✨ सम्यक्त्व से सिद्धत्व की यात्रा
भगवान महावीर की साधना यात्रा के प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया गया, जिसमें उनकी पाँच प्रतिज्ञाएँ, मार्ग में आए अनुकूल एवं प्रतिकूल उपसर्ग, और कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहने वाली उनकी साधना का परिचय मिलता है।
🔱 शूलपाणि यक्ष का जीवन परिवर्तन और अस्थिग्राम का उद्धार — जानिए किस प्रकार भगवान महावीर की साधना, समता और निर्भयता ने इन प्रसंगों को आध्यात्मिक प्रेरणा का माध्यम बनाया।
🌿 इस प्रवचन से प्रेरणा लें:
• दुर्लभ मानव जीवन का महत्त्व समझें।
• अपने जीवन को संस्कारों और सद्गुणों से समृद्ध बनाएँ।
• अवसरों का सदुपयोग करें, ताकि बाद में पछताना न पड़े।
• प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य, समता और आत्मबल बनाए रखें।
• भगवान महावीर की साधना से प्रेरणा लेकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ें।
🙏 प्रवचन श्रवण करें, आत्मचिंतन करें और जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प लें।
🎙️ प्रवचनकर्ता: उत्तर भारतीय प्रवर्तिनी श्रमणी सूर्या डॉ. श्री सरिता जी म. सा.
📿 श्रृंखला: सम्यक्त्व से सिद्धत्व की यात्रा
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