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अभंग - राम होऊनी राम गा रे…

शब्द सूर संवादु

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अभंग - राम होऊनी राम गा रे…

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शब्द सूर संवादु
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राम होऊनी राम गा रे, रामासी शरण रिघा रे॥ धृ ॥ कोण कैचा हे विचारा, नका कर्म करू व्यभिचारा॥ १ ॥ हा दुस्तर भव हराया हराया, तुम्ही जोडा सखा गुरुराया॥ २ ॥ म्हणे माणिक निज राम पहावा, तयालागि हृदयीच जपावा॥ ३ ॥ राग: शिवरंजनी रचना: संत माणिक प्रभू संगीत: संगीता भिडे ताल: भजनी