विजय का कोई अर्थ नहीं... अर्जुन की व्यथा 😢 | Mahabharat
Bhagvad Gita
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अपनों के बिना अर्जुन को राज्य भी नहीं चाहिए था! 😢 | गीता श्लोक 32 | Mahabharat
Description
श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 1 | श्लोक 32 | PART 33
कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अपने ही परिवार, गुरु और प्रियजनों को सामने देखकर अर्जुन का मन पूरी तरह विचलित हो चुका था।
पिछले भाग में अर्जुन ने कहा कि उसे न विजय चाहिए, न राज्य और न ही सुख। अब अर्जुन श्रीकृष्ण से पूछता है कि जब जिन लोगों के लिए राज्य और सुख चाहिए, वही युद्धभूमि में सामने खड़े हैं, तो ऐसे राज्य और सुख का क्या अर्थ है?
📖 गीता श्लोक 32:
“किं नो राज्येन गोविन्द
किं भोगैर्जीवितेन वा।
येषामर्थे काङ्क्षितं नो
राज्यं भोगाः सुखानि च॥”
🙏 इस श्लोक में अर्जुन अपने मन की गहरी दुविधा श्रीकृष्ण के सामने व्यक्त करता है।
🔔 अगले भाग में: अर्जुन बताएगा कि युद्धभूमि में खड़े ये लोग उसके लिए कौन-कौन हैं और वह उनके विरुद्ध युद्ध क्यों नहीं करना चाहता।
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