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दुर्गा सप्तशती पहला अध्याय सम्पूर्ण कथा | राजा सुरथ को मोह क्यों हुआ? | मधु कैटभ कैसे मरे? |

moti singh Rathore

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दुर्गा सप्तशती पहला अध्याय सम्पूर्ण कथा | राजा सुरथ को मोह क्यों हुआ? | मधु कैटभ कैसे मरे? |

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moti singh Rathore
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॥ ॐ श्रीदुर्गायै नमः ॥ देवी माहात्म्य (दुर्गासप्तशती पाठ) अध्याय 01 - मधु कैटभ वध ॥* इस अध्याय में - मेधा ऋषि का राजा सुरथ और समाधि वैश्य को भगवती की महिमा बताते हुए मधु-कैटभ-वध का प्रसंग सुनाना ध्यान श्लोक: भगवान् विष्णु के सो जाने पर मधु और कैटभ को मारने के लिये कमलजन्मा ब्रह्माजी ने जिनका स्तवन किया था, उन महाकाली देवी का मैं सेवन करता हूँ। वे अपने दस हाथों में खड्ग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, शूल, भुशुण्डि, मस्तक और शंख धारण करती हैं। उनके तीन नेत्र हैं। वे समस्त अंगों में दिव्य आभूषणों से विभूषित हैं। उनके शरीर की कान्ति नीलमणि के समान है तथा वे दस मुख और दस पैरों से युक्त हैं। कथा सार: स्वारोचिष मन्वन्तर में चैत्रवंश में उत्पन्न राजा सुरथ का समस्त भूमण्डल पर अधिकार था। कोलाविध्वंसी क्षत्रियों से परास्त होकर, मंत्रियों द्वारा राजधानी, सेना, खजाना हथियाये जाने पर वे घने जंगल में मेधा मुनि के आश्रम में गये। वहाँ समाधि नामक वैश्य मिला जिसे उसके दुष्ट स्त्री-पुत्रों ने धन लोभ से घर से निकाल दिया था। दोनों मोह-ममता से दुखी थे। मेधा ऋषि बोले - यह भगवती महामाया का प्रभाव है। वे ही ज्ञानियों के चित्त को भी बलपूर्वक मोह में डाल देती हैं। वे ही परा विद्या, संसार-बन्धन और मोक्ष की हेतुभूता सनातनी देवी हैं। कल्पान्त में एकार्णव में भगवान विष्णु शेषशय्या पर योगनिद्रा में सो रहे थे। उनके कानों के मैल से मधु-कैटभ उत्पन्न होकर ब्रह्माजी को खाने दौड़े। ब्रह्माजी ने योगनिद्रा स्तुति की - तुम्हीं स्वाहा, स्वधा, वषट्कार, तुम्हीं महाविद्या, महामाया, महामेधा, कालरात्रि, महारात्रि, मोहरात्रि हो... तब योगनिद्रा भगवान के नेत्र, मुख, नासिका, बाहु, हृदय, वक्ष से निकलकर खड़ी हो गयीं। भगवान जागे और 5000 वर्षों तक बाहुयुद्ध के बाद महामाया द्वारा मोहित असुरों से वर माँगकर जाँघ पर रखकर चक्र से मस्तक काट दिये। ॥ इस प्रकार मार्कण्डेय पुराण में सावर्णिक मन्वन्तर की कथा के अन्तर्गत देवीमाहात्म्य में 'मधु-कैटभ-वध' नामक पहला अध्याय पूरा हुआ ॥1॥ #DeviMahatmyam #DurgaSaptashati #Adhyay01 #MadhuKaitabhVadh #Mahakali #MedhaRishi #RajaSurath #SamadhiVaishya #YognidraStuti #MarkandeyPuran #rathorebhinchari #bhakti #jaishriram