अंगद ने रावण को उसकी कुल-मर्यादा (पुलस्त्य ऋषि के वंश) और शिव-ब्रह्मा से प्राप्त वरदानों की याद...
Mahishanu RanaUk13
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अंगद ने रावण को उसकी कुल-मर्यादा (पुलस्त्य ऋषि के वंश) और शिव-ब्रह्मा से प्राप्त वरदानों की याद...
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जावानीस रामायण (Kakawin Ramayana) या इंडोनेशियाई परंपरा में रावण और अंगद (या काकविन में वर्णित संबंधित पात्रों) के संवाद का सीधा या शब्द-दर-शब्द जावा से हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं है, क्योंकि जावानीस रामायण भारतीय वाल्मीकि रामायण से काफी अलग शैली (काकविन छंद) और स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों में लिखी गई है।
यदि आप भारतीय परंपरा (रामचरितमानस या रामचंद्रिका) के अंगद-रावण संवाद का हिंदी अर्थ चाहते हैं, तो उसका मुख्य सार और संवाद इस प्रकार है:
• अंगद का परिचय व चेतावनी: अंगद ने रावण को उसकी कुल-मर्यादा (पुलस्त्य ऋषि के वंश) और शिव-ब्रह्मा से प्राप्त वरदानों की याद दिलाई, और कहा कि पराई स्त्री (माता सीता) का हरण करके वह विनाश की ओर बढ़ रहा है।
• रावण का अहंकार: रावण ने वानर (अंगद) के रूप में उसका उपहास किया और अपनी शक्ति का घमंड दिखाया।
• अंगद की चुनौती (पैर जमाना): अंगद ने लंका की भरी सभा में अपना पैर जमा दिया और रावण या उसकी सेना को चुनौती दी कि यदि कोई उस पैर को हिला दे, तो श्री राम अपनी हार मानकर लौट जाएंगे। रावण का कोई भी योद्धा और स्वयं रावण भी अंगद का पैर नहीं हिला सका।