भगवद्गीता अध्याय 5 | कर्म संन्यास योग | कर्म छोड़ना नहीं, फल की आसक्ति छोड़ना सीखें | #bhagwadgeeta
Kanha ki pyari
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भगवद्गीता अध्याय 5 | कर्म संन्यास योग | कर्म छोड़ना नहीं, फल की आसक्ति छोड़ना सीखें | #bhagwadgeeta
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Kanha ki pyari
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🙏 जय श्री कृष्ण 🙏 राधे राधे ❤️
श्रीमद्भगवद्गीता के पाँचवें अध्याय – कर्म संन्यास योग में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि सच्चा संन्यास कर्मों को छोड़ देना नहीं, बल्कि कर्मों के फल की आसक्ति का त्याग करना है।
इस अध्याय में श्री कृष्ण बताते हैं कि मनुष्य संसार में रहते हुए अपने सभी कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाकर भी आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।
🌺 इस वीडियो में जानिए: • कर्म संन्यास और कर्मयोग में क्या अंतर है?
• सच्चा संन्यासी कौन है?
• कर्म करते हुए फल की चिंता कैसे छोड़ें?
• कमल के पत्ते की तरह संसार में रहते हुए निर्लिप्त कैसे रहें?
• सुख-दुख में समान कैसे रहें?
• काम और क्रोध पर नियंत्रण कैसे पाएं?
• हर प्राणी में परमात्मा को कैसे देखें?
• भगवान श्री कृष्ण के अनुसार सच्ची शांति कैसे प्राप्त होती है?
भगवद्गीता का संदेश:
✨ कर्म करते रहिए, लेकिन उसके फल को भगवान श्री कृष्ण को समर्पित कर दीजिए। ✨
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🙏 राधे राधे 🙏
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