½ किलो चावलसे हल्के जालीदार गुड़ के अनारसे I 1/2 Kg Rice Anarsa I Authentic Maharashtrian अनारसा
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½ किलो चावलसे हल्के जालीदार गुड़ के अनारसे I 1/2 Kg Rice Anarsa I Authentic Maharashtrian अनारसा
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दिवाली के पारंपरिक महाराष्ट्रीयन फराळ की खास रेसिपी – गुड़ के हल्के जालीदार अनारसे!
सिर्फ ½ किलो चावल से बनाएं खुसखुशीत, स्वादिष्ट और परफेक्ट जालीदार अनारसे। सही प्रमाण और आसान स्टेप्स के साथ सीखिए आजी के हाथों की याद दिलाने वाली Authentic Maharashtrian Anarsa Recipe.
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अनारसा(Around 40 numbers)
साहित्य (Ingredients)
कोलम चावल – ½ किलो (पुराना चावल)
कटा हुआ सूखा गुड़ – 2½ कप (360 ग्राम)
खसखस – अनारसे par लगाने के लिए)
दूध – आवश्यकतानुसार
घी – तलने के लिए
घी या तेल – हाथ और प्लेट पर लगाने के लिए
इस रेसिपी से लगभग 40 अनारसे बनेंगे।
कृती (Method)
1. चावल भिगोना और फर्मेंट करना
1. आधा किलो पुराना कोलम चावल लें। आप कोई भी पुराना चावल इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन स्टिकी राइस बिल्कुल न लें।
2. चावल को दो बार अच्छी तरह धोकर पानी में 3 दिन के लिए भिगोकर रखें।
3. हर सुबह और शाम चावल का पानी बदलें। इससे चावल में दुर्गंध नहीं आएगी।
4. तीसरे दिन चावल में ऊपर की तरफ छोटे-छोटे बुलबुले दिखाई देंगे। हंडी को हल्का हिलाने पर और बुलबुले दिखाई देंगे। इसका मतलब चावल में फर्मेंटेशन शुरू हो गया है।
2. चावल का आटा तैयार करना
1. चौथे दिन सुबह चावल का पानी निकालकर एक बार फिर धो लें।
2. चावल को छलनी में 15–20 मिनट रखें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।
3. अब चावल को सूती कपड़े पर फैलाकर पंखे के नीचे लगभग 30 मिनट रखें।
4. ध्यान रखें कि चावल पूरी तरह सूखना नहीं चाहिए। उसमें हल्का मॉइश्चर रहना बहुत जरूरी है। हाथ से दबाने पर चावल थोड़ा टूटना चाहिए।
5. अब मिक्सर में चावल को बारीक पीस लें।
6. तैयार आटे को मैदे वाली जीरो नंबर की बारीक छलनी से छान लें। ऊपर बचा मोटा आटा वापस मिक्सर में पीसकर छान लें।
7. इस तरह बिल्कुल बारीक चावल का आटा तैयार करें।
इस प्रक्रिया में आधा किलो चावल से लगभग 540 ग्राम यानी करीब साढ़े पाँच कप चावल का आटा तैयार हुआ।
3. गुड़ मिलाना और आटा तैयार करना
1. तैयार चावल के आटे में 2½ कप (360 ग्राम) बारीक कटा हुआ गुड़ डालें।
2. यहां सूखा कोल्हापुरी गुड़ इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। चिक्की वाला या चिपचिपा गुड़ इस्तेमाल न करें।
3. चावल के आटे और गुड़ को हाथों से अच्छी तरह मिला लें।
4. अब इस मिश्रण को एक बार मिक्सर में चलाएं, ताकि गुड़ के बड़े टुकड़े भी पूरी तरह बारीक हो जाएं।
5. इससे एक चिकना और हल्का स्टिकी डो तैयार होगा।
6. आटे की लोइयां बनाकर स्टेनलेस स्टील के डिब्बे में रखें और कम से कम 1–2 दिन मुरने के लिए छोड़ दें। 3–4 दिन मुराने पर अनारसे और भी अच्छे बनते हैं।
4. अनारसे का डो तैयार करना
1. पांचवें या छठे दिन जितने अनारसे बनाने हैं, उतना ही डो निकालें।
2. हाथों और प्लेट पर थोड़ा घी या तेल लगाएं।
3. डो में 4–5 बूंद दूध डालकर अच्छी तरह मसलें, ताकि डो बिल्कुल नरम और मुलायम हो जाए।
4. अब डो को रोल करके लगभग 20–25 ग्राम के बराबर छोटे टुकड़ों में काट लें।
5. अनारसे बनाना
1. एक बार में एक ही गोला लेकर अनारसा तैयार करें। सभी गोले एक साथ बनाकर न रखें।
2. हाथों पर थोड़ा घी या तेल लगाकर गोले को गोल आकार दें।
3. अब इसे खसखस के ऊपर रखें।
4. दो या तीन उंगलियों पर थोड़ा घी लगाकर धीरे-धीरे अनारसे को फैलाएं।
5. अनारसे को बहुत पतला न फैलाएं। हल्का मोटा रखें, ताकि बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट बने।
6. अनारसे तलना
1. कड़ाही में घी गरम करें। मैंने अनारसे घी में फ्राई किए हैं।
2. गरम घी में अनारसा खसखस वाली साइड ऊपर रखकर डालें।
3. अब लगातार ऊपर से गरम घी डालते रहें। इससे अनारसा अच्छी तरह फूलता है।
4. अनारसे को पलटना नहीं है। इसकी खसखस वाली साइड ऊपर ही रहेगी।
5. सुनहरा भूरा (Golden Brown) होने तक अच्छी तरह फ्राई करें।
6. तैयार अनारसे को निकालकर जाली पर 15–20 मिनट रखें, ताकि अतिरिक्त घी नीचे निकल जाए।
7. अनारसे को स्टोर करना
अनारसे पूरी तरह ठंडे होने के बाद एयरटाइट कंटेनर में भरकर रखें। ये लगभग 8–10 दिन तक अच्छे रहते हैं।
शेफ टिप्स (Chef Tips)
1. अनारसे के लिए पुराना चावल लेना बहुत जरूरी है। स्टिकी राइस इस्तेमाल न करें।
2. चावल में हल्का मॉइश्चर रहना चाहिए। पूरी तरह सूखा चावल इस्तेमाल करने से बचें।
3. गुड़ हमेशा सूखा और कम चिपचिपा होना चाहिए।
4. डो को मुरने के लिए पर्याप्त समय दें।
5. अनारसे का डो दूध डालकर अच्छी तरह नरम करना जरूरी है।
6. अनारसे बहुत पतले न फैलाएं, वरना वे सख्त हो सकते हैं।
7. फ्राई करते समय ऊपर से लगातार गरम घी डालें और अनारसे को पलटें नहीं।
एक खास बात – आजी की रसोई की समझदारी
अनारसे तलने के बाद जो अतिरिक्त घी निकलता था, उसे हमारी आजी परात में रखी सूजी में gholane देती थीं। बाद में उसी सूजी से रवा-बेसन के लड्डू बनाए जाते थे। यानी न घी की बर्बादी और न किसी चीज का अपव्यय। हमारे बुजुर्गों की रसोई की यह समझदारी भी सीखने लायक है।
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