Nepalo Kotari || बल मि क्य छौं || New Garhwali Song Puzzles 1009 Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
Jagmora Garhwali Puzzles song
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Nepalo Kotari || बल मि क्य छौं || New Garhwali Song Puzzles 1009 Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
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Nepalo Kotari || बल मि क्य छौं || New Garhwali Song Puzzles 1009 Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
lyrics:
काठौ बिरळो मि बणौलू
बल म्यांम्यां कोजि करौलू
काठौ बिरलो मि बणौलू
बल तांड्यां कोजि करौलू
काठा बिरळा जि होंदा
म्यांमार म्यांम्यां नि करदू
काठा बिरला नि होंदा
केदार तांड्यां नि करदू
पांडव कन्ना जैकी खोज
वु लुकणु उड्यारों मा रोज
त घ्वीड़ तैं चांठो प्यारो
च केदारकांठो प्यारो
जु काठगोदाम बणौलू
कोठारी पंडौ नचौलू
अर काठमांडू बणौलू
केदारी तंडौ नचौलू
केदारघाटी को नाथ
ह्वैगीं डोट पशुपतिनाथ
गोरखपुर गुरखा डुट्याल
खैगीं रोट गोरखनाथ
जख पंडौबाज रिंगौण मा
पंडौ ध्यावा पंचकेदार
वख सतचक्रा सैजोग मा
सतऋषि ध्यावा सत्केदार
जु बल भागीरथी गंगा
बौगद उत्तरकाशी धाम
त मेरी बागमती गंगा
बौगद बाराणसी धाम
पशुपतिनाथौ डांडू छौं
पोखू काठौ भांडू छौं
रज्जौ धानी काठौ मंडप
नेपालौ कोठारी क्य छौं?
भावार्थ-१
अलाणा-फलाणा (अमुक-समुक) अपने काठी केदार (जिसे जगमोरा पजल स्वरूप काठी अखोड़/अखरोट की तरह आसानी से क्रैक/हल नहीं किया जा सकता है, जिसे सहज योग-ध्यान, नोट -3, में बैठकर सातों चक्रों के क्रमानुसार जागृत होते हुये कुंडली जागृत होने के पश्चात ही हल किया जा सकता है, यानी केदारनाथ के फलीभूत होने हेतु दिमाग के सातों घोड़े दौड़ाने होते हैं, यानी सातों/सप्त केदार, नोट -4, पूजने पड़ते हैं, तब जाके काठी/पजल बल कगजी/पंजल होती है) की आधारभूत भूमिका स्वरूप पहेली खेल के प्रथम चरण में अपनी संदर्भित बात को कहावत अनुसार आगे बढ़ाते हुए कहता है कि बल काठ का बिरळो (बिल्ला) मैं यानी अमुक बनायेगा, बल म्यांम्यां कौन जी करेगा? काठ का बिरलो (बिरला/अजूबा) मैं यानी अमुक बनायेगा, बल तांड्यां (तांडव) कौन जी करेगा? काठ के बिरळा (बिल्ले) जी होते, म्यांमार (बर्मा देश) म्यांम्यां नहीं करता, काठ के बिरले (अजूबे) नहीं होते, केदार बाबा तांड्यां (तांडव) नहीं करता।
भावार्थ-२
अमुक भ्रामकता के मकड़जाल में फंसाते हुए पहेली खेल के भ्रामक दूसरे चरण में अपनी संदर्भित बात को पांडव संदर्भित पौराणिक आख्यान के अनुसार आगे बढ़ाते हुए कहता है कि बल मोक्ष प्राप्ति हेतु बल पांडव कर रहे हैं जिसकी खोज, वह लुकणु (छिप रहा है) उड्यारों (गुफाओं) में रोज, तो कहावत अनुसार घ्वीड़ (हिरन) को चांठो (अपना चट्टानी बीहड़ निवास) प्यारा, है केदारकांठा (उत्तरकाशी जनपद, उत्तराखंड, भारत में अवस्थित क्षेत्र, नोट-5) प्यारा, यानी सभी को अपना घर गांव निवास प्यारा होता है। अमुक पुनः अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहता है कि बल जो काठगोदाम (नैनीताल जनपद में हल्द्वानी के निकट क्षेत्र जो काठ यानी लकड़ियों के गोदाम के रूप में जाना जाता है) बनायेगा, कोठारी पांडव नाचेगा, और काठमांडू (नेपाल की राजधानी, नोट-6) बनायेगा, केदारी बाबा तंडौ (तांडव) नाचेगा।
भावार्थ-३
अमुक भ्रामकता के मकड़जाल से ससम्मान बाहर निकाल कर वेबसाइट स्वरूप पहेली खेल के ज्ञानमयी तीसरे चरण में भावनात्मक एवम संवेदनात्मक स्वरूप अपनी संदर्भित बात को आगे बढ़ाते हुए कहता है कि बल केदारघाटी का नाथ, हो गये डोट (डोट्याल यानी दो शरीर एक आत्मा स्वरूप) पशुपतिनाथ (पशु और पालक स्वरूप), गोरखपुर गोरखा डुट्याल, खा गए रोट गोरखनाथ। जहां पंडौबाज (पांडव नृत्य) रिंगौण (गोल गोल घेरे की चक्री) में, पांडव ध्यावें पंचकेदार (नोट 4), वहां सात चक्रों के सहजयोग (नोट-3) में, सप्तऋषि ध्यावें सत्केदार (सात केदार, नोट नोट-4)।
भावार्थ-४
अमुक पहेली खेल के चौथे अंतिम निर्णायक चरण में अपनी संरचनात्मक एवम गुणात्मक विशेषताओं का बखान करते हुए अपनी संदर्भित बात को आगे बढ़ाते हुये कहता है कि जो बल भागीरथी गंगा, बहती है उत्तरकाशी धाम (उत्तराखंड), तो मेरी (अमुक) की बागमती गंगा, बहती है बाराणसी धाम। अंत में अमुक पहेली खेल के अनुसार प्रश्नात्मक शैली में कहता और पूछता है कि बल पशुपतिनाथ का डांडू (वन क्षेत्र) है, पोखू (पोखरियाल ब्राह्मणों के देवता) का काठ का भांडू (बर्तन) है, नेपाली राजा का धानी काठ का मंडप, तो बताओ कि तथाकथित नेपाल का कोठारी (अन्न धन्न धान के कोठार का मुख्य व्यवस्थापक) बल वह क्या है?