युवाचार्य भगवन सुधर्मा सभा और कर्म कैसे कटते हैं
kamla choudhary
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युवाचार्य भगवन सुधर्मा सभा और कर्म कैसे कटते हैं
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चौबीसवीं गाथा… और जैसे समय कुछ क्षण ठहर गया
युवाचार्य भगवंत श्री महेन्द्र ऋषिजी म. ने वीरथुई पुच्छिस्सुणं संपुट की चौबीसवीं गाथा में लव-सप्तम, सुधर्मा सभा, निर्वाण और भगवान महावीर की श्रेष्ठता का ऐसा मर्म खोला, जो सीधे हृदय तक उतरता है।
तपते लोहे पर पड़ती चोट से झरते सूक्ष्म कणों का उदाहरण आया तो वेदना और निर्जरा का अंतर भी बहुत सहज हो गया हर कष्ट ऊँचाई नहीं देता, ऊँचाई वहाँ जन्म लेती है जहाँ भीतर कुछ शुद्ध होता है।
लव-सप्तम ने क्षण का मूल्य बताया…सुधर्मा सभा ने मर्यादा का स्वरूप…निर्वाण ने अकंप शांति का अर्थ…और भगवान महावीर ने ज्ञान की पूर्णता।
कुछ बातें सुनकर खत्म नहीं होतीं…वे भीतर बहुत देर तक शांत होकर बैठी रहती हैं।🙏✍️..
12 अक्टूबर 2026 सोमवार
आनन्द अनुभूति वर्षावास भीलवाड़ा