तन संसारी, मन बैरागी | यही फकीरी सार | कबीर प्रेरित भजन | Nirgun Bhajan | Lyrical Video
Divine Bhakti Vibes
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तन संसारी, मन बैरागी | यही फकीरी सार | कबीर प्रेरित भजन | Nirgun Bhajan | Lyrical Video
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तन संसारी, मन बैरागी… यही फकीरी सार। 🙏
यह कबीर-प्रेरित निर्गुण भजन उस फकीरी की बात करता है जिसमें संसार छोड़ना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए मन को माया से मुक्त रखना है।
न गेरूआ वस्त्र जरूरी हैं, न जटा-जूट, न वनवास…
सच्ची फकीरी तो मन के मैल को धोने और भीतर बसे राम को पहचानने में है।
घर-परिवार में रहो, कर्म करो, कमाओ, संसार के काम निभाओ — लेकिन मन को माया का गुलाम मत बनने दो।
🌿 तन संसारी…
🕊️ मन बैरागी…
🙏 यही फकीरी सार॥
यह भजन कबीर की निर्गुण विचारधारा और लोक-फकीरी भाव से प्रेरित एक मौलिक रचना है।
🎵 SONG LYRICS:
[Opening – Immediate Hook]
न गेरूआ, न जटा-जूट रे,
न वन जाना काम।
मन का मैल उतार रे बंदे,
भीतर बैठे राम॥
जग में रहकर जग से न्यारा,
जैसे कमल अपार।
जल में रहके जल न भिगोए,
ऐसी कर ले चाल॥
[Main Hook]
तन संसारी, मन बैरागी,
यही फकीरी सार॥
तन संसारी…
मन बैरागी…
यही फकीरी सार॥
[Verse 1]
घर में रहियो, मन न अटके,
मन में राखियो राम।
हाथ कमाए, मन न फँसे रे,
यही फकीरी सार॥
रोटी सूखी, चादर थोड़ी,
मन में पूरा धाम।
जितना मिले, उतने में हँस ले,
मुख से निकले राम॥
[Hook]
तन संसारी, मन बैरागी,
यही फकीरी सार॥
तन संसारी…
मन बैरागी…
यही फकीरी सार॥
[Verse 2]
माया आए, माया जाए,
मन न जाए साथ।
हाथ रहे संसार के काम में,
मन रहे रघुनाथ॥
धन हो थोड़ा, धन हो ज्यादा,
मन न हो गुलाम।
जितना मिला, बाँट के खा ले,
यही सच्चा नाम॥
[Verse 3]
तन तो चले हाट-बजार में,
मन जाए निज धाम।
जग के मेले में रहियो बंदे,
मन में राखियो राम॥
माटी की ये देह रे बंदे,
माटी होय तन एक दिन।
साँस-साँस में नाम बसा ले,
यही अमर विश्राम॥
[Hook]
तन संसारी, मन बैरागी,
यही फकीरी सार॥
तन संसारी…
मन बैरागी…
यही फकीरी सार॥
[Verse 4]
न गेरूआ, न जटा-जूट रे,
न वन जाना काम।
मन का मैल उतार रे बंदे,
भीतर बैठे राम॥
जग में रहकर जग से न्यारा,
जैसे कमल अपार।
जल में रहके जल न भिगोए,
ऐसी कर ले चाल॥
[Verse 5]
लेना-देना जग का जितना,
कर ले हँसकर आज।
मन की डोरी राम से बाँधो,
बाकी सब काज॥
ना कुछ अपना, ना कुछ पराया,
सब उसका ही धाम।
मन खाली कर बैठ रे बंदे,
भीतर बोले राम॥
[Final Hook]
तन संसारी, मन बैरागी,
यही फकीरी सार॥
तन संसारी…
मन बैरागी…
यही फकीरी सार॥
[Outro]
तन संसारी…
मन बैरागी…
यही…
फकीरी…
सार…
राम…
━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🎧 MUSIC STYLE:
Authentic Nirgun Kabir folk-fusion with earthy live acoustic instrumentation, rustic soulful male vocals, ektara, tanpura, dholak, khartal, manjira, harmonium and soft bansuri. A raw, intimate fakir-like folk sound with a memorable, hummable refrain.
🙏 अगर यह भजन आपके मन को छुए, तो Comment में लिखें — “राम” ❤️
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